तुम बहुत खुश हो
भुलाकर मुझे,
खूब हँस रही हो
रुलाकर मुझे,
तुम भूलो तो भूलो
मै तुम्हे ना भुलाऊंगा,
तुम्हारी खुशी की खातिर
तुम्हारी राह पर ना आऊँगा,
पर ये मन बावरा है
ये कुछ नही समझता,
तुम्ही पर बरसता है
तुम्ही को तरसता है,
मै रहूँ ना रहूँ
पर तुम खुश रहो,
तुम्हारी हँसी मे ही
मै मुस्कुराऊंगा,
मै याद रखूँगा
कि तुम्हे याद ना करूँ,
पर पता नही कब तक
ये याद रख पाऊंगा,
जो हो सके मुझसे
तो मुझे माफ कर देना,
अब से मै तुम्हे
हिचकियोँ मे सताऊंगा,
जानता हूँ मे
तुम्हे नफरत है मुझसे,
इस नफरत का बोझ
मै उम्र भर उठाऊँगा,
यूँ तो मे तुम्हे
कुछ दे ना सका,
पर खुशी की एक वजह
ज़रूर दे जाऊंगा,
मेरे शब्द तुम्हे
बहुत चुभते हैँ ना,
तो अब से मै तुम्हे लिखने को
क़लम ना उठाऊंगा,
गर जो गलती से
कुछ लफ्ज़ छूट भी पड़े,
तो आखिरी बार तुम्हे
अलविदा लिख जाऊंगा,
मै आखिरी बार तुम्हे बस अलविदा लिख जाऊंगा....
Sunday, 31 July 2016
तुम बहुत खुश हो
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